अंगारकी संकष्टी चतुर्थी ५ मे २०२६ | तारीख, मुहूर्त, पूजा विधी, व्रत कथा | Angarki Sankashti Chaturthi 5 May 2026

 





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॥ अंगारकी संकष्टी चतुर्थी ५ मे २०२६ ॥

तारीख, मुहूर्त, पूजा विधी, व्रत कथा आणि महत्त्व


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🌟 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी म्हणजे काय?


अंगारकी संकष्टी चतुर्थी म्हणजे **मंगळवारी येणारी संकष्टी चतुर्थी**. 'अंगारक' म्हणजे मंगळ ग्रह. मंगळवारी येणाऱ्या चतुर्थीला 'अंगारकी' म्हणतात. या दिवशी भगवान गणपतीची विशेष पूजा केली जाते.


'संकष्टी' म्हणजे 'संकटातून मुक्ती'. या व्रताने सर्व संकटे दूर होतात आणि मनोकामना पूर्ण होतात अशी श्रद्धा आहे.


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📅 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी ५ मे २०२६ – तारीख आणि मुहूर्त


| बाब | तपशील |

|-----|--------|

| **तारीख** | मंगळवार, ५ मे २०२६ |

| **चतुर्थी तिथी सुरू** | ४ मे २०२६ रोजी (तपशील पंचांगानुसार) |

| **चतुर्थी तिथी समाप्त** | ५ मे २०२६ रोजी (तपशील पंचांगानुसार) |

| **चंद्रोदय वेळ** | ५ मे रोजी रात्री (स्थानिक पंचांग पाहा) |

| **पूजेचा सर्वोत्तम वेळ** | चंद्रोदयानंतर |रात्रि १०:१९


> ⚠️ **लक्षात ठेवा:** २०२६ मध्ये तीन अंगारकी योग आहेत – ६ जानेवारी, **५ मे** आणि २९ सप्टेंबर.


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🌟 अंगारकी संकष्टी चतुर्थीचे महत्त्व


| क्र. | महत्त्व | स्पष्टीकरण |

|-----|---------|------------|

| १ | **दुर्मिळ संयोग** | मंगळवारी येणारी चतुर्थी अत्यंत दुर्मिळ आणि पवित्र मानली जाते |

| २ | **मनोकामना पूर्ती** | या व्रताने सर्व मनोकामना पूर्ण होतात |

| ३ | **संकटनाश** | या व्रताने सर्व संकटे दूर होतात |

| ४ | **ग्रहदोष निवारण** | मंगळ ग्रहाचे दोष दूर होतात |

| ५ | **गणपतीची विशेष कृपा** | गणपती बाप्पा प्रसन्न होतात |


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📖 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (पौराणिक कथा)


**कथा प्रारंभ:**


एकेकाळी एका गरीब ब्राह्मणाला पुत्र नव्हता. तो नेहमी भगवान गणपतीची पूजा करीत असे. एकदा मंगळवारी चतुर्थीच्या दिवशी त्याने कठोर उपवास केला. रात्री चंद्रोदयानंतर त्याने विधीपूर्वक गणपतीची पूजा केली.


गणपती प्रसन्न झाले. त्याने ब्राह्मणाला दर्शन देऊन वरदान मागायला सांगितले. ब्राह्मणाने पुत्रप्राप्तीची मागणी केली. गणपतीने त्याला पुत्रप्राप्तीचा वर दिला आणि म्हणाले, **"मंगळवारी जो कोणी विधीपूर्वक हे व्रत करील, त्याची सर्व संकटे दूर होतील आणि मनोकामना पूर्ण होतील."**


तेव्हापासून मंगळवारी येणाऱ्या चतुर्थीला **'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी'** म्हणून ओळखले जाते.


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🪔 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पूजा विधी (Step by Step)


| क्र. | पूजा विधी | कसे करावे? |

|-----|-----------|------------|

| १ | **स्नान** | सकाळी लवकर उठून स्नान करा |

| २ | **व्रत संकल्प** | दिवसभर उपवास करण्याचा संकल्प करा (फळे, दूध घेऊ शकता) |

| ३ | **स्वच्छता** | पूजेच्या जागेची स्वच्छता करा |

| ४ | **गणपती स्थापना** | गणपतीची मूर्ती किंवा चित्र स्थापित करा |

| ५ | **पंचामृत अभिषेक** | दूध, दही, तूप, मध, साखर यांनी अभिषेक करा |

| ६ | **पूजन** | हळद-कुंकू, अक्षता, फुले वाहा |

| ७ | **दूर्वा वाहा** | गणपतीला २१ दूर्वा अर्पण करा |

| ८ | **मोदक नैवेद्य** | गणपतीला मोदकाचा नैवेद्य दाखवा |

| ९ | **मंत्र जप** | 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्राचा जप करा (१०८ वेळा) |

| १० | **आरती** | 'सुखकर्ता दुखहर्ता' आरती करा |

| ११ | **चंद्रोदय पूजन** | रात्री चंद्रोदयानंतर चंद्राला अर्घ्य द्या |

| १२ | **पारणे** | चंद्रोदयानंतर उपवास सोडा |


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🌿 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पूजेसाठी साहित्य


| साहित्य | वापर |

|---------|------|

| गणपती मूर्ती/चित्र | पूजेसाठी |

| हळद, कुंकू | पूजन |

| अक्षता (तांदूळ) | पूजन |

| दूर्वा (२१) | गणपतीला प्रिय |

| लाल फुले | पूजन |

| मोदक | नैवेद्य |

| पंचामृत | अभिषेक |

| दिवा, उदबत्ती, कापूर | आरती |

| दूध, उडद, तिळ | चंद्रार्घ्य |

| नारळ | पूजन |


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📿 अंगारकी संकष्टी चतुर्थी मंत्र


**गणपती मूल मंत्र:**

ॐ गं गणपतये नमः


**गणेश गायत्री मंत्र:**

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।

तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥


**संकटनाशक मंत्र:**

ॐ श्री गणेशाय नमः


**चंद्र मंत्र (अर्घ्यासाठी):**

ॐ सोमाय नमः


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🍬 अंगारकी संकष्टी चतुर्थीला नैवेद्यासाठी पदार्थ


| पदार्थ | विशेषता |

|--------|---------|

| **मोदक** | गणपतीला अत्यंत प्रिय |

| **दूर्वा पंचामृत** | २१ दूर्वा, दूध, दही, तूप, मध |

| **खव्याचे मोदक** | विशेष नैवेद्य |

| **फळे** | केळी, सफरचंद, डाळिंब |

| **साखर-हळद** | शुभ |


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🌙 चंद्रार्घ्य विधी (चंद्रोदय पूजन)


| क्र. | विधी | स्पष्टीकरण |

|-----|------|------------|

| १ | चंद्रोदयाची प्रतीक्षा करा | रात्री चंद्र उगवेल त्या वेळी |

| २ | तांब्याच्या ताम्हणात दूध, उडद, तिळ घाला | अर्घ्य देण्यासाठी |

| ३ | चंद्राला अर्घ्य द्या | 'ॐ सोमाय नमः' मंत्राने |

| ४ | 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्राचा जप करा | १०८ वेळा |

| ५ | गणपतीला दूर्वा अर्पण करा | २१ दूर्वा |

| ६ | उपवास सोडा (पारणे करा) | फलाहाराने |


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❌ अंगारकी संकष्टी चतुर्थीला टाळण्यासारख्या गोष्टी


❌ भात (तांदूळ) खाऊ नका

❌ क्रोध करू नका

❌ वाद-विवाद करू नका

❌ मांसाहार टाळा

❌ दारू, तंबाखू टाळा

❌ चंद्रार्घ्याशिवाय पारणे करू नका


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✅ अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रताचे फायदे (फलश्रुती)


| फायदा | स्पष्टीकरण |

|--------|------------|

| सर्व संकटे दूर होतात | 'संकष्टी' म्हणूनच नाव |

| मनोकामना पूर्ण होतात | श्रद्धेने केलेली मनोकामना पूर्ण होते |

| ग्रहदोष निवारण | मंगळ ग्रहाचे दोष दूर होतात |

| सुख-समृद्धी | घरात सुख-शांती येते |

| गणपतीची विशेष कृपा | गणपती बाप्पा प्रसन्न होतात |


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॥ श्री गणेशार्पणमस्तु ॥


🙏 अंगारकी संकष्टी चतुर्थीच्या हार्दिक शुभेच्छा 🙏


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## 📅 २०२६ मधील अंगारकी संकष्टी चतुर्थीच्या तारखा


| क्र. | तारीख | दिवस |

|-----|-------|------|

| १ | ६ जानेवारी २०२६ | मंगळवार |

| २ | **५ मे २०२६** | **मंगळवार** |

| ३ | २९ सप्टेंबर २०२६ | मंगळवार |


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