संत ज्ञानेश्वर महाराज | संपूर्ण चरित्र, साहित्य, शिकवण आणि महत्त्व | ज्ञानेश्वरीचे जनक

 



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॥ संत ज्ञानेश्वर महाराज ॥

माऊली | ज्ञानेश्वरी | ज्ञानदेव | वारकरी संप्रदाय


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🌟संत ज्ञानेश्वर महाराज – परिचय


संत ज्ञानेश्वर महाराज हे १३ व्या शतकातील महाराष्ट्राचे थोर संत, कवी, तत्त्वज्ञ आणि योगी होऊन गेले. त्यांना **'माऊली'** म्हणूनही ओळखले जाते. त्यांच्या 'ज्ञानेश्वरी' ग्रंथाने मराठी साहित्याला नवी उंची गाठून दिली. अवघ्या २१ वर्षांच्या अल्पायुष्यात त्यांनी अजरामर साहित्य निर्माण केले .


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📅 संत ज्ञानेश्वर महाराज – जन्म व कुटुंब


| बाब | तपशील |

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| **मूळ नाव** | ज्ञानेश्वर विठ्ठल कुलकर्णी |

| **जन्म** | इ.स. १२७५ (श्रावण कृष्ण अष्टमी - कृष्ण जन्माष्टमी) |

| **जन्मस्थळ** | आपेगाव, पैठण (गोदावरी नदीकाठ) |

| **समाधी** | इ.स. १२९६, आळंदी  |

| **वडील** | विठ्ठलपंत कुलकर्णी (आडनाव)  |

| **आई** | रुक्मिणीबाई |

| **गुरू** | निवृत्तिनाथ (मोठे बंधू) |

| **भावंडे** | निवृत्तिनाथ, सोपानदेव, मुक्ताबाई|


संत ज्ञानेश्वर महाराज यांचा जन्म इ.स. १२७५ मध्ये पैठणजवळील आपेगाव येथे झाला. ते मूळचे देशस्थ ब्राह्मण कुटुंबातील होते.


वडील विठ्ठलपंत हे लेखापाल (कुलकर्णी) होते. ते अध्यात्मप्रवण होते. वडिलांच्या सन्यास घेण्याच्या निर्णयामुळे कुटुंबावर कठोर परिस्थिती आली. यामुळे समाजात त्यांना जातिबाह्य करण्यात आले.


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📚 ज्ञानेश्वरी – अमर साहित्य


इ.स. १२९० मध्ये अवघ्या १५ वर्षीय ज्ञानेश्वर महाराजांनी **ज्ञानेश्वरी (भावार्थदीपिका)** ग्रंथाची रचना केली .


| बाब | माहिती |

|-----|--------|

| **मूळ नाव** | भावार्थदीपिका |

| **प्रसिद्ध नाव** | ज्ञानेश्वरी |

| **रचना वर्ष** | इ.स. १२९० |

| **आधार** | श्रीमद्भगवद्गीता |

| **भाषा** | मराठी (ओवीबद्ध) |

| **शिष्य (लेखन साहाय्यक)** | सच्चिदानंद |


ज्ञानेश्वरी हा भगवद्गीतेवरील टीकात्मक ग्रंथ आहे. हा ग्रंथ म्हणजे मराठीतील आजवरचा पहिला ज्ञात तत्त्वज्ञानाचा ग्रंथ आहे.


**वैशिष्ट्ये:**


| गुणवैशिष्ट्य | स्पष्टीकरण |

|--------------|------------|

| **सोपी भाषा** | गीतेतील क्लिष्ट संकल्पना सोप्या मराठीत मांडल्या |

| **ओवी छंद** | चालते बोलते लिहित असे ओवी छंद (४ अक्षरी)|

| **रचनाबद्धता** | शब्दांची खेळी, अर्थगांभीर्य |

| **अभिव्यक्ती** | केवळ भाषांतर नव्हे, तर आत्मानुभवातून उतरलेले तत्त्वज्ञान |


ज्ञानेश्वरीमुळे मराठी भाषेला अभिजात दर्जा प्राप्त झाला. हा ग्रंथ म्हणजे वारकरी संप्रदायाचा पाया होय.


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📖 अमृतानुभव – अद्वैताचा सिद्धांत


ज्ञानेश्वरांचा दुसरा महत्त्वाचा ग्रंथ म्हणजे **अमृतानुभव**.


| बाब | माहिती |

|-----|--------|

| **रचना वर्ष** | इ.स. १२९२ |

| **विषय** | अद्वैत वेदांत |

| **शैली** | प्रगल्भ, अत्यंत क्लिष्ट असे तत्त्वज्ञान |

| **प्रसिद्धी** | दुर्बोध असले तरी मराठीत पहिली मूळ तत्त्वज्ञानाची रचना |


या ग्रंथात ज्ञानदेवांनी आत्मा व परमात्मा यांचा अभेद सांगितला आहे.


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🕉️ इतर साहित्य


| ग्रंथ | वैशिष्ट्य |

|-------|------------|

| **हरिपाठ** | २८ ओव्यांची रचना, नामस्मरणाचा महिमा |

| **चांगदेव पासष्टी** | चांगदेव महाराजांशी संवाद |

| **अभंग** | लोकप्रिय, भक्तीगीते |


ज्ञानेश्वरांचे अभंग अत्यंत सोपे, गोड आणि अर्थपूर्ण आहेत.


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📜 चरित्रातील काही रंजक घटना


| घटना | तपशील |

|-------|--------|

| **म्हशीचे वाचन** | समाजाने शूद्र केले, म्हशीवरून वेदवचनांचे शुद्धीकरण असा प्रकार प्रचलित |

| **भिंतीवरील स्वारी** | चांगदेव महाराजांची गुरुदर्पण भंग करणारी घटना |

| **विठ्ठलाचे दर्शन** | पंढरपूर येथे भेट आणि अभंगरचनेस प्रारंभ |


या अलौकिक घटना ज्ञानेश्वरांची दैवी शक्ती दर्शवितात.


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💠 पसायदान (विश्वकल्याणाची प्रार्थना)


ज्ञानेश्वरीच्या शेवटी, १८ ओव्यांमध्ये, ज्ञानदेवांनी केलेली प्रार्थना. ही प्रार्थना अहंपणाला विरोधक आहे.


**पहिली ओवी:**


आणि प्रीतीचीये पसायदानु । सुखाचिया नांदणे सुखांना । विश्वकल्याण होऊन राहो । सर्व सुखी सुखी ।।


**अर्थ: (थोडक्यात)** या प्रार्थनेत ज्ञानदेव स्वत:साठी काहीही मागत नाहीत, तर संपूर्ण विश्वाचे कल्याण मागतात. वर्षा यावी, भुकेची पीडा मिटो, सर्व लोक सुखी राहो, अशी प्रार्थना.


या प्रार्थनेतून ज्ञानदेवांची उदारता व विश्वबंधुत्वाची भावना दिसून येते.


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🌟 संत ज्ञानेश्वर महाराजांची शिकवण


| क्र. | शिकवण | स्पष्टीकरण |

|-----|--------|------------|

| १ | **नामस्मरण** | हरिनाम स्मरण हाच परम धर्म |

| २ | **स्वानुभव** | शास्त्रापेक्षा स्वानुभव प्रमाण आहे |

| ३ | **सोयरे सर्वत्र** | विश्वचैतन्य एकरूपता, सर्व एकाच आत्म्याचे अंश आहेत |

| ४ | **वैराग्य** | वस्तीकडे व मनाची स्थिरता |

| ५ | **ज्ञान ही शक्ती** | ज्ञान ही खरी संपत्ती आहे |


ज्ञानदेवांनी सर्वांना जातीपातीच्या भिंती ओलांडून विठ्ठलभेटीचा अधिकार दिला.


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🙏 प्रसिद्ध अभंग


**अभंग १:**


ज्ञानदेवे रचिला पाया। उभारीले देवालया।।


**अर्थ:** ज्ञानेश्वरांनी (वारकरी) भक्तीचा पाया रचला, सर्वांसाठी अध्यात्मिक इमारत उभी केली.


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**अभंग २:**


आळंदी हे गाव पुण्यभूमी ठाव। दैवताचे नाव सिद्धेश्वर।।


**अर्थ:** आळंदी हे पुण्यक्षेत्र असून तेथील दैवत सिद्धेश्वर आहे.


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**अभंग ३:**


महाविष्णूचा अवतार। सखा माझा ज्ञानेश्वर।।


**अर्थ:** ज्ञानेश्वर महाराज हे महाविष्णूचे अवतार आहेत .


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📍 समाधी स्थळ (आळंदी)


संत ज्ञानेश्वर महाराजांची समाधी **आळंदी** (पुणे जिल्हा) येथे आहे.


| तपशील | माहिती |

|--------|--------|

| **स्थान** | आळंदी, पुणे (इंद्रायणी नदीकाठ) |

| **समाधी दिनांक** | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (इ.स. १२९६)|

| **स्मारक** | संत ज्ञानेश्वर महाराज समाधी मंदिर, आळंदी |


येथे अखंड दिव्य ज्योत तेवत असते. भाविक मोठ्या संख्येने येथे दर्शनासाठी येतात.


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📿 पठण नियम


| नियम | स्पष्टीकरण |

|------|------------|

| वेळ | सकाळी, संध्याकाळी |

| शुद्धता | स्वच्छ जागी बसा |

| पूजन | संत ज्ञानेश्वर महाराजांचे चित्रसमोर दिवा लावा |

| अभंग पठण | हरिपाठ, ज्ञानेश्वरीतील ओव्या म्हणा |

| स्मरण | नित्य पसायदान म्हणा |


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