सोमवती अमावस्या १५ जून २०२६ | पितृशांती, स्नान-दान, शनि पूजा व पिंपळ पूजा | संपूर्ण माहिती

 




॥ ॐ पितृदेवताभ्यो नमः ॥


🌑 **सोमवती अमावस्या (दर्श अमावस्या) – १५ जून २०२६** 🌑


ज्येष्ठ महिन्याच्या कृष्ण पक्षातील अमावस्या ही **‘सोमवती अमावस्या’** म्हणून ओळखली जाते कारण ही अमावस्या **सोमवारी** येते. २०२६ मध्ये ही अमावस्या **१५ जून** रोजी आहे. या दिवसाला **‘दर्श अमावस्या’** असेही म्हणतात.


हा दिवस पितृशांती, स्नान-दान, शनि पूजा व पिंपळ पूजेसाठी अत्यंत महत्त्वाचा मानला जातो.



### सोमवती अमावस्या म्हणजे काय?


| बाब | तपशील |

|---|---|

| **तारीख** | १५ जून २०२६ |

| **वार** | सोमवार |

| **महिना** | ज्येष्ठ (अधिक ज्येष्ठ महिन्यातील शेवटची अमावस्या) |

| **प्रकार** | पितृशांती, श्राद्ध, तर्पण, दान, शनि पूजा, पिंपळ पूजा |

| **इतर नावे** | दर्श अमावस्या |


ही अमावस्या **अधिक ज्येष्ठ महिन्याची शेवटची (निमित्ता) अमावस्या** देखील आहे, ज्यामुळे याचे महत्त्व अधिकच वाढले आहे. या दिवशी **नदी, तलाव, कुंडात स्नान** करणे व **दान** करणे फार फलदायी मानले जाते.



### धार्मिक महत्त्व (Significance)


| बाब | फलश्रुती |

|---|---|

| **पितृशांती** | पूर्वजांच्या आत्म्यास शांती मिळते, पितृदोष निवारण होतो |

| **स्नान (दर्श स्नान)** | गंगा, यमुना, गोदावरी, कावेरी किंवा अन्य पवित्र नदीत स्नान केल्यास पुण्य लाभते |

| **शनि पूजा** | या दिवशी शनिदेवाची पूजा केल्यास शनि दशा, साढेसाती, ढैया यांचे दुष्परिणाम कमी होतात |

| **पिंपळ पूजा** | पिंपळ वृक्षाला (बोधिवृक्ष) जल, दूध, हळद-कुंकू, दिवा अर्पण केल्यास सुख-समृद्धी मिळते |

| **दान** | विशेष द्रव्यांचे दान केल्याने अपार पुण्य मिळते |

| **पितरांचे तर्पण** | जाणाऱ्या पूर्वजांसाठी तर्पण (पाणी, कुश, तिळ अर्पण) केल्यास ते प्रसन्न होतात |



### सोमवती अमावस्येचे नियम व पूजा विधी


#### १. स्नान आणि त्याची सामग्री (पवित्र स्नान)

| सामग्री | हेतू |

|---|---|

| **गंगाजल** | पवित्रता, पापनाश |

| **काळे तिळ (Black Sesame Seeds)** | पितरांना समर्पित, पितृदोष निवारक |

| **सरसों का तेल (Mustard Oil)** | शरीराला लावून स्नान, पापक्षय |

| **हळद, गंध, फुले** | देवी-देवतांना समर्पण |



#### २. विशेष दान (Donation Specials)


| वस्तू | महत्त्व / फल |

|---|---|

| **तिळ (काळे तिळ)** | पितरांना तृप्ती; दान केल्यास पितृदोष मिटतो |

| **सरसों का तेल (सरसोंचे तेल)** | शनिदेव प्रसन्न होतात; दीपदानासाठी उपयोगी |

| **फल (फळे)** | संतान प्राप्ती, आरोग्य लाभ |

| **जल (पाणी)** | पाण्याचे दान (घड भरणे) – तहान नाहीशी |

| **छाता, वस्त्र, सत्तू** | सत्तू (गरमीत शीतलता), वस्त्र – आराम; छाता – आश्रय |

| **जूता / चप्पल** (जत-चप्पल) | याचा अर्थ ‘जूता-चप्पल’ – भटक्यांसाठी पायरक्षण, दान केल्याने यात्रा सुलभ होते, रोगांचा नाश होतो |

| **शनि दीपक** | लोखंडाचा दिवा किंवा सरसोंच्या तेलाचा दिवा शनिवार / अमावस्येला दान करावा |


**नोंद:** तुमच्या फोटोप्रमाणे ‘तिल का’, ‘सरसों के तेल’, ‘काले तिल’, ‘फल’, ‘जल’, ‘छाता’, ‘वस्त्र’, ‘सत्तू’, ‘जत-चप्पल’ या सर्वांचा या दिवशी दान करणे अत्यंत शुभ मानले जाते. ‘तिल का’ म्हणजे तिळाचे दान – पितरांना अर्पण. ‘जत-चप्पल’ म्हणजे जोडीच्या चपला (पादुका) दान – यामुळे रोग व दारिद्रय दूर होते.


#### ३. पूजा विधी (Step by Step)


| पायरी | क्रिया |

|---|---|

| **१. प्रातः स्नान** | लवकर उठून नदी / घरी शुद्ध पाण्याने स्नान (तिळ + मोहरी तेल) |

| **२. शनि पूजा** | शनि मंदिरात किंवा घरी शनि यंत्रासमोर तेल (सरसों), तिळ, काळे वस्त्र अर्पण |

| **३. पितरांचे तर्पण** | पितरांना काळे तिळ, अक्षता, पाणी, कुश, फुले अर्पण करून ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ म्हणा |

| **४. पिंपळ पूजा** | पिंपळाला जल, दूध, हळद-कुंकू, फुले व दिवा दाखवा; १०८ वेळा ‘ॐ पिंपळदेवाय नमः’ जपा |

| **५. दान** | वरील सामग्री (तिळ, तेल, फळ, पाण्याचा घड, छाता, वस्त्र, सत्तू, चपला) गरजवंताला / ब्राह्मणाला / पितृग्रह (श्राद्ध स्थळी) दान करा |

| **६. दीपदान** | दिवसा / संध्याकाळी तुळशीसमोर, पिंपळाखाली किंवा मंदिरात सरसोंच्या तेलाचा दिवा / शनि दीपक लावा |

| **७. व्रत/उपवास** | अमावस्येचा उपवास (किंवा फळाहार) करा; पितरांचे नावाने प्रसाद वाटा |



### शनि पूजा व पिंपळ पूजा – विशेष फल


| पूजा | लाभ |

|---|---|

| **शनि पूजा** | ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र जप; तेल (काळे तीळ + सरसों) अर्पण; शनिवार / अमावस्येस केल्यास शनि दोष मिटतो |

| **पिंपळ पूजा** | पिंपळ हे त्रिमूर्तीचे (विष्णू, शिव, ब्रह्मा) स्थान; प्रदक्षिणा व दीपदान केल्याने संतान प्राप्ती, सुख, आरोग्य, पितृशांती |



### उपसंहार


सोमवती अमावस्या हा पितृ, शनि व पिंपळ यांच्या कृपेचा संगम आहे. या दिवशी दिलेले दान (तिळ, तेल, फळ, पाणी, छाता, वस्त्र, सत्तू, चप्पल) व स्नान केल्याने **पितर तृप्त होतात, शनि प्रसन्न होतो व आयुष्यात सुख-समृद्धी नांदते**.


**१५ जून २०२६** रोजी या सोप्या विधींचे पालन करून पुण्य मिळवा.


**॥ ॐ पितृभ्यो नमः ॥**

**॥ ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥**

**॥ ॐ पिंपळदेवाय नमः ॥**


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