श्री दुर्गाष्टक | अर्थासह संपूर्ण माहिती | दुर्गा मातेची स्तुती
॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
🌸 **श्री दुर्गाष्टक – दुर्गा मातेची अष्टश्लोकी स्तुती** 🌸
श्री दुर्गाष्टक हे भगवती दुर्गा मातेच्या स्तुतीतील अत्यंत पवित्र व शक्तिशाली स्तोत्र आहे. 'अष्टक' म्हणजे **आठ श्लोकांचे** स्तोत्र. या स्तोत्रात देवीच्या विविध रूपांचे, नावांचे व गुणांचे वर्णन आहे.
या स्तोत्राचा नियमित पाठ केल्याने **मातेची कृपा** प्राप्त होते, सर्व संकटे दूर होतात, भय नाहीसे होते व मनोकामना पूर्ण होतात.
**एकूण श्लोक : ९** (१-८ स्तोत्र, ९ फलश्रुती)
### श्री दुर्गाष्टकम् – श्लोक व अर्थ (Marathi Meaning)
#### श्लोक १
**॥ कात्यायनि महामाये खड्गबाणधनुर्धरे ।**
**खड्गधारिणि चण्डि दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥१॥**
**अर्थ:** हे कात्यायनी (कात्यायन ऋषींची पुत्री / उपास्य देवता), महामाये (महान माया), खड्ग (तलवार), बाण व धनुष्य धारण करणाऱ्या, खड्गधारिणी (तलवार धारण करणारी), चंडी (उग्र / प्रचंड), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक २
**॥ वसुदेवसुते कालि वासुदेवसहोदरि ।**
**वसुन्धराश्रिये नन्दे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥२॥**
**अर्थ:** हे वसुदेवसुते (वसुदेवाच्या पुत्री, देवकी?), काली (काळ्या / काळाची देवी), वासुदेवसहोदरी (वासुदेव/श्रीकृष्ण यांची बहीण), वसुंधराश्रिये (पृथ्वीची लक्ष्मी / वैभव), नंदे (आनंद देणारी), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक ३
**॥ योगनिद्रे महानिद्रे योगमाये महेश्वरि ।**
**योगसिद्धिकरी शुद्धे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥३॥**
**अर्थ:** हे योगनिद्रे (योगाची निद्रा / विष्णूची योगनिद्रा), महानिद्रे (महान निद्रा / प्रळयकालीन निद्रा), योगमाये (योगाची माया), महेश्वरी (महेश्वराची पत्नी / महान ईश्वरी), योगसिद्धिकरी (योगसिद्धी देणारी), शुद्धे (पवित्र), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक ४
**॥ शङ्खचक्रगदापाणे शार्ङ्गज्यायतबाहवे ।**
**पीताम्बरधरे धन्ये दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥४॥**
**अर्थ:** हे शंख, चक्र, गदा (हातात) धारण करणाऱ्या, शार्ङ्ग (धनुष्य) व ज्या (मोठ्या) बाहू असलेल्या, पीतांबरधरे (पिवळे वस्त्र धारण करणाऱ्या), धन्ये (पवित्र / कृतार्थ करणारी), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक ५
**॥ ऋग्यजुस्सामाथर्वाणश्चतुस्सामन्तलोकिनि ।**
**ब्रह्मस्वरूपिणि ब्राह्मि दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥५॥**
**अर्थ:** हे ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद व चारीही (सामन्त?) लोकांत (व्यापून) असणाऱ्या, ब्रह्मस्वरूपिणी (ब्रह्माचे स्वरूप), ब्राह्मी (ब्रह्माची शक्ती / ब्राह्मणरूप), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक ६
**॥ वृष्णीनां कुलसम्भूते विष्णुनाथसहोदरि ।**
**वृष्णिरूपधरे धन्ये दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥६॥**
**अर्थ:** हे वृष्णी (यादव / कृष्ण) कुळात उत्पन्न झालेल्या, विष्णुनाथसहोदरी (विष्णू / श्रीकृष्ण यांची बहीण), वृष्णिरूपधरे (वृष्णी (बैल? धर्म?) रूप धारण करणारी), धन्ये, हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक ७
**॥ सर्वज्ञे सर्वगे शर्वे सर्वेशे सर्वसाक्षिणि ।**
**सर्वामृतजटाभारे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥७॥**
**अर्थ:** हे सर्वज्ञे (सर्व जाणणारी), सर्वगे (सर्वत्र व्यापून राहणारी), शर्वे (कल्याणकारी / शिवा), सर्वेशे (सर्वांची ईश्वरी), सर्वसाक्षिणी (सर्वाची साक्षी), सर्वामृतजटाभारे (सर्व अमृताचा जटाभार धारण करणारी), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### श्लोक ८
**॥ अष्टबाहु महासत्त्वे अष्टमी नवमि प्रिये ।**
**अट्टहासप्रिये भद्रे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ॥८॥**
**अर्थ:** हे अष्टबाहु (आठ हातांची), महासत्त्वे (महान सत्त्व / शक्ती), अष्टमी (अष्टमी तिथी) व नवमी (नवमी तिथी) प्रिये, अट्टहासप्रिये (मोठा हास्य / गर्जना आवडणारी), भद्रे (कल्याणकारी / मंगल), हे दुर्गादेवी, तुला नमस्कार असो.
#### फलश्रुती (स्तोत्रपठणाचे फळ – श्लोक ९)
**॥ दुर्गाष्टकमिदं पुण्यं भक्तितो यः पठेन्नरः ।**
**सर्वकाममवाप्नोति दुर्गालोकं स गच्छति ॥९॥**
**अर्थ:** जो मनुष्य **भक्तीने** (भक्तितो) हे **पुण्यद** (पुण्य देणारे) **दुर्गाष्टक** पठण करतो, त्याला **सर्व इच्छित कामे** (सर्वकाम) प्राप्त होतात व तो अंती **दुर्गालोक** (दुर्गा मातेचे धाम) प्राप्त करतो.
### स्तोत्राचे महत्त्व व पठण लाभ
| बाब | तपशील |
|---|---|
| **स्तोत्र प्रकार** | अष्टक (आठ श्लोक) – दुर्गा मातेची स्तुती |
| **मुख्य स्वरूप** | देवीची विविध रूपे, नावे, गुण व महिमा |
| **नियमित पठण लाभ** | संकटनिवारण, भयमुक्ती, शत्रुनाश, मनोकामना पूर्ती, मोक्षप्राप्ती |
| **पठण वेळ** | प्रातःकाळ, संध्याकाळी, **अष्टमी/नवमीला, नवरात्रात** |
| **विशेष** | देवीला **आठ हात, अष्टमी-नवमी प्रिय** म्हणून संबोधन |
### पठण पद्धती
1. स्वच्छ जागी बसून दुर्गा मातेच्या चित्रासमोर दिवा लावावा.
2. एकाग्रचित्ताने सर्व ९ श्लोक म्हणावेत (श्लोक १-८ स्तोत्र, ९ फलश्रुती).
3. शेवटी **‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’** ११ किंवा १०८ वेळा जप करावा.
### उपसंहार
‘श्री दुर्गाष्टक’ हे दुर्गा मातेच्या **विविध रूपांचे, नावांचे व महिम्याचे** दर्शन घडविणारे अत्यंत भावपूर्ण स्तोत्र आहे. याचा नियमित पाठ केल्याने भक्ताला **मातेची विशेष कृपा** प्राप्त होते, सर्व संकटे दूर होतात, भय नाहीसे होते व सर्व कार्ये सिद्ध होतात.
**॥ ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥**
**॥ जय माता दी ॥**
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